Written by SANTOSH KUMAR
Ambedkar Nagar 06-march-2020
कोरोना वायरस
(कोविद -19) का प्रकोप तब सामने आया जब 31 दिसंबर, 2019 को चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में अज्ञात कारण से निमोनिया के मामलों में हुई अत्यधिक वृद्धि के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया गया।
तत्पश्चात विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया। शीघ्र ही यह बीमारी चीन और दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गई। पहले इस वायरस को SARS-CoV-2 नाम दिया गया, जिसका बाद में COVID-19 नाम से आधिकारिक नामकरण किया गया।
पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (Polymerase Chain Reaction-PCR) टेस्ट कोविद-19 वायरस के लिये पहला परीक्षण है, जिसके तहत सभी संदिग्ध रोगियों का परीक्षण किया जाता है।
यदि इस टेस्ट में परिणाम सकारात्मक रहता है तो पुष्टि के लिये नमूना पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (National Institute of Virology-NIV) को भेजा जाता है, जो कि वर्तमान में जीनोम अनुक्रमण करने वाली एकमात्र सरकारी प्रयोगशाला है।
WHO के अनुसार, COVID-19 में CO का तात्पर्य कोरोना से है, जबकि VI विषाणु को, D बीमारी को तथा संख्या 19 वर्ष 2019 (बीमारी के पता चलने का वर्ष ) को चिन्हित करता है।
WHO द्वारा इसका नामकरण वैश्विक एजेंसी विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health) और खाद्य एवं कृषि संगठन ( Food and Agriculture Organization) द्वारा वर्ष 2015 में जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत किया गया है।
चीन क्यों है वायरस के प्रति अति संवेदनशील?
ऐसे स्थान जहाँ मनुष्यों और जानवरों में अनियमित रक्त और अन्य शारीरिक संपर्क जैसा संबंध स्थापित होता है, वहाँ पर इस वायरस का अधिक प्रसार होता है।
चीन के पशु बाज़ार ऐसे ही स्थलों के उदाहरण हैं जहाँ जानवरों से मनुष्यों में वायरस के संचरण की अधिक संभावना है।
चीन के बाज़ारों में कई जानवरों का माँस बिकने के कारण ये बाज़ार मानव में वायरस की प्रायिकता को बढ़ा देते हैं।
जब एक बड़ा मानव समुदाय इस वायरस के संचरण शृंखला में शामिल हो जाता है तो उत्परिवर्तन (Mutation) की स्थिति उत्पन्न होती है जो कि मानव समुदाय के लिये घातक सिद्ध होती है।
वायरस के प्रति भारत की सुभेद्यता
दुनिया भर से आने वाले लोगों की बड़ी संख्या के कारण किसी भी बीमारी के प्रति भारत स्थित हवाई अड्डे एक हॉटस्पॉट के रूप में हो सकते हैं।
भारत की आबादी का एक बड़ा वर्ग सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करता है, जो कोविद-19 के प्रसार को तेज़ कर सकता है।
हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर लगे थर्मल स्क्रीनिंग जैसे उपकरण भी कोविद-19 वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि संक्रमित व्यक्ति में ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) के दौरान इसके लक्षण प्रकट नहीं हो रहे हैं।
कोविद-19 वायरस की जाँच के लिये किया जा रहा आणविक परीक्षण भी संदेहास्पद है क्योंकि इसके अधिकांश परिणाम गलत रहे हैं।
भारत में भौतिक और मानवीय संसाधन के स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना अपर्याप्त है।
लोगों में स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूकता का अभाव है।
वायरस के लक्षण
इसके सामान्य लक्षणों में खाँसी, बुखार और श्वसन क्रिया में रुकावट मुख्य लक्षण हैं।
वहीं गंभीर संक्रमण में निमोनिया, किडनी का फेल होना शामिल है जिससे मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है।
From studentnewsbysk
Ambedkar Nagar 06-march-2020
कोरोना वायरस
(कोविद -19) का प्रकोप तब सामने आया जब 31 दिसंबर, 2019 को चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में अज्ञात कारण से निमोनिया के मामलों में हुई अत्यधिक वृद्धि के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया गया।
तत्पश्चात विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया। शीघ्र ही यह बीमारी चीन और दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गई। पहले इस वायरस को SARS-CoV-2 नाम दिया गया, जिसका बाद में COVID-19 नाम से आधिकारिक नामकरण किया गया।
पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (Polymerase Chain Reaction-PCR) टेस्ट कोविद-19 वायरस के लिये पहला परीक्षण है, जिसके तहत सभी संदिग्ध रोगियों का परीक्षण किया जाता है।
यदि इस टेस्ट में परिणाम सकारात्मक रहता है तो पुष्टि के लिये नमूना पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (National Institute of Virology-NIV) को भेजा जाता है, जो कि वर्तमान में जीनोम अनुक्रमण करने वाली एकमात्र सरकारी प्रयोगशाला है।
WHO के अनुसार, COVID-19 में CO का तात्पर्य कोरोना से है, जबकि VI विषाणु को, D बीमारी को तथा संख्या 19 वर्ष 2019 (बीमारी के पता चलने का वर्ष ) को चिन्हित करता है।
WHO द्वारा इसका नामकरण वैश्विक एजेंसी विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health) और खाद्य एवं कृषि संगठन ( Food and Agriculture Organization) द्वारा वर्ष 2015 में जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत किया गया है।
चीन क्यों है वायरस के प्रति अति संवेदनशील?
ऐसे स्थान जहाँ मनुष्यों और जानवरों में अनियमित रक्त और अन्य शारीरिक संपर्क जैसा संबंध स्थापित होता है, वहाँ पर इस वायरस का अधिक प्रसार होता है।
चीन के पशु बाज़ार ऐसे ही स्थलों के उदाहरण हैं जहाँ जानवरों से मनुष्यों में वायरस के संचरण की अधिक संभावना है।
चीन के बाज़ारों में कई जानवरों का माँस बिकने के कारण ये बाज़ार मानव में वायरस की प्रायिकता को बढ़ा देते हैं।
जब एक बड़ा मानव समुदाय इस वायरस के संचरण शृंखला में शामिल हो जाता है तो उत्परिवर्तन (Mutation) की स्थिति उत्पन्न होती है जो कि मानव समुदाय के लिये घातक सिद्ध होती है।
वायरस के प्रति भारत की सुभेद्यता
दुनिया भर से आने वाले लोगों की बड़ी संख्या के कारण किसी भी बीमारी के प्रति भारत स्थित हवाई अड्डे एक हॉटस्पॉट के रूप में हो सकते हैं।
भारत की आबादी का एक बड़ा वर्ग सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करता है, जो कोविद-19 के प्रसार को तेज़ कर सकता है।
हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर लगे थर्मल स्क्रीनिंग जैसे उपकरण भी कोविद-19 वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि संक्रमित व्यक्ति में ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) के दौरान इसके लक्षण प्रकट नहीं हो रहे हैं।
कोविद-19 वायरस की जाँच के लिये किया जा रहा आणविक परीक्षण भी संदेहास्पद है क्योंकि इसके अधिकांश परिणाम गलत रहे हैं।
भारत में भौतिक और मानवीय संसाधन के स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना अपर्याप्त है।
लोगों में स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूकता का अभाव है।
वायरस के लक्षण
इसके सामान्य लक्षणों में खाँसी, बुखार और श्वसन क्रिया में रुकावट मुख्य लक्षण हैं।
वहीं गंभीर संक्रमण में निमोनिया, किडनी का फेल होना शामिल है जिससे मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है।
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7 टिप्पणियां:
Hello
Jharkhand
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How are you friend
What's mean
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